Noida E-Bus: नोएडा में बेहतर और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की उम्मीद से शुरू की गई 100 इलेक्ट्रिक बसों की व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। संचालन शुरू हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन यात्रियों के लिए न तो पर्याप्त स्टॉपेज तैयार हुए हैं और न ही बसों की लाइव ट्रैकिंग शुरू हो सकी है। इसका असर सीधे यात्रियों पर पड़ रहा है। कई व्यस्त स्थानों पर लोग बस का इंतजार करते रह जाते हैं, जबकि खाली ई-बसें बिना रुके आगे निकल जाती हैं। निगरानी के बिना व्यवस्था मामला सिर्फ ड्राइवरों की मनमानी तक सीमित नहीं दिखता। बसों के संचालन, निगरानी और जवाबदेही से जुड़ी पूरी व्यवस्था ही अधूरी नजर आ रही है। जब किसी बस की लोकेशन, रूट और स्टॉपेज पर रुकने की जानकारी तत्काल उपलब्ध नहीं होगी तो यात्रियों की शिकायतों पर कार्रवाई कैसे होगी, यही बड़ा सवाल है। यात्रियों ने हाथ दिया बस नहीं रुकी शनिवार दोपहर करीब 1:30 बजे पड़ताल के दौरान सेक्टर-37 में 20 से 25 यात्री बस का इंतजार करते मिले। इसी दौरान एक ई-बस वहां पहुंची। बस लगभग खाली थी, लेकिन सड़क किनारे खड़े यात्रियों ने हाथ देकर उसे रोकने का प्रयास किया। इसके बावजूद चालक ने बस नहीं रोकी और आगे बढ़ गया। यह स्थिति उस समय और गंभीर हो जाती है जब सेक्टर-37 जैसे स्थान को शहर के प्रमुख ट्रांसपोर्ट हब में गिना जाता है। यात्रियों की भीड़ दोपहर करीब 3 बजे सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग ई-बस का इंतजार करते दिखे। मेट्रो से निकलने वाले यात्रियों के बीच बस की सुविधा को लेकर असमंजस बना हुआ था। कई यात्रियों को मजबूरी में ऑटो का सहारा लेना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि कभी बस रुकती है तो कभी चालक बिना रुके निकल जाता है। निर्धारित स्टॉपेज स्पष्ट नहीं होने से यह भी पता नहीं चलता कि बस कहां मिलेगी। 40 स्टॉपेज का दावा नोएडा अथॉरिटी ने करीब 40 स्थानों पर ई-बस स्टॉपेज विकसित करने की बात कही थी। लेकिन अभी तक प्रक्रिया एस्टिमेट तैयार होने से आगे नहीं बढ़ सकी है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौड़ चौक जैसे व्यस्त इलाकों में भी यात्रियों को बस के लिए इंतजार करना पड़ता है। लाइव ट्रैकिंग भी अधर में बसों के संचालन से पहले दावा किया गया था कि करीब 15 दिन में जीपीएस आधारित लाइव ट्रैकिंग शुरू कर दी जाएगी। इससे बस की लोकेशन, रूट और स्टॉपेज पर रुकने की जानकारी मिलनी थी। लेकिन ढाई महीने बाद भी यह व्यवस्था लागू नहीं हुई है। शिकायतों के बाद ड्राइवरों को प्रशिक्षण दिया गया, लेकिन यात्रियों के मुताबिक स्थिति में खास बदलाव नहीं आया। बसें हैं सुविधा नहीं नोएडा अथॉरिटी के जीएम सिविल एसपी सिंह के अनुसार, स्टॉपेज का एस्टिमेट तैयार हो चुका है और करीब डेढ़ महीने में काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, लाइव ट्रैकिंग सिस्टम यूपीएसआरटीसी तैयार कर रही है। इसके शुरू होने के बाद बसों की आवाजाही और स्टॉपेज पर रुकने का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन निगरानी में आ सकेगा। फिलहाल सवाल यही है, जब बसें मौजूद हैं, यात्री भी हैं, तो आखिर सार्वजनिक परिवहन की यह सुविधा जमीन पर यात्रियों के काम क्यों नहीं आ रही? ये भी पढ़ें: परी चौक से स्लीपर बस तक कैसे पहुंची 16 साल की छात्रा? गैंगरेप केस में नोएडा-दिल्ली पुलिस की जांच उलझी